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Elderly Care India

“मैं कौन हूँ” – डिमेंशिया के 7 चरण

कल्पना कीजिए कि कोई बुजुर्ग व्यक्ति अपनी याददाश्त खो बैठता है, किसी अनजान शहर में भटक जाता है और किसी से मदद मांगने में भी असमर्थ हो जाता है। 

यह किसी डरावनी फिल्म के दृश्य जैसा लग सकता है लेकिन वास्तव में यह हममें से किसी के साथ भी हो सकता है। यह स्थिति कोई बुरा सपना नहीं है जिसे जागने के बाद हम भूल सकें, बल्कि यह डिमेंशिया का सबसे दुर्भाग्यपूर्ण और स्याह दौर है यानी—कोई भी कभी भी इसमें प्रवेश कर सकता है लेकिन कभी बाहर नहीं निकल सकता....

जब बच्चे मासूमियत से डिमेंशिया से पीड़ित बुजुर्गों को अपना नाम दोहराने के लिए कहकर चिढ़ाते हैं, तो यह कोई हंसी की बात नहीं है, वास्तव में यह उन बुजुर्गों के मन में भ्रम और घबराहट पैदा कर सकता है जो डिमेंशिया के सात चरणों में से किसी एक से गुजर रहे हैं।

जैसे-जैसे डिमेंशिया के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, यह महत्वपूर्ण है कि देखभालकर्ताओं, नीति निर्माताओं, सरकारी विभागों और सामान्य समाज को डिमेंशिया देखभाल की बुनियादी बातों को समझना चाहिए।

डिमेंशिया कई मायनों में एक समान तरीके से आगे बढ़ता है, लेकिन यह भी देखा गया है कि यह हर व्यक्ति में अलग-अलग रूप ले सकता है।

डिमेंशिया से पीड़ित अधिकांश लोगों की स्वास्थ्य स्थिति आमतौर पर समय के साथ गिरती जाती है, जो निम्नलिखित चरणों से होकर गुजरती है:

1) प्रारंभिक / हल्का डिमेंशिया (Early / Mild Dementia): धीमी कार्यात्मक गिरावट जिसके परिणामस्वरूप हाल की याददाश्त, निर्णय लेने की क्षमता, तार्किक तर्क, योजना बनाने में समस्याएं और बातचीत में मामूली समस्याएं हो सकती हैं। व्यवस्थित करने या योजना बनाने में असमर्थता बढ़ जाती है।

खाना पकाने, वित्तीय प्रबंधन, दवाइयों को छांटने, तकनीक आदि जैसी गतिविधियों में चुनौतियों का सामना करना शुरू हो जाता है। परिचित स्थानों पर भी रास्ता भटकने की संभावना आम हो जाती है।

2) मध्यम डिमेंशिया (Moderate Dementia): याददाश्त, निर्णय लेने और सामान्य कार्यों में दुर्बलता का सामना करना शुरू हो जाता है। समग्र रूप से व्यक्तिगत स्वच्छता और संवारना अक्सर प्रभावित होता है और स्वतंत्र रूप से बाथरूम का उपयोग करना कठिन हो जाता है। गिरने की घटनाएं अधिक होने लगती हैं।

संवाद संबंधी समस्याएं बढ़ जाती हैं। भटक जाना और खो जाना अधिक सामान्य हो जाता है।

वे खाना भूल सकते हैं और जब तक उन्हें याद न दिलाया जाए तब तक नहीं खाते, अथवा तुरंत दोबारा खाने की इच्छा कर सकते हैं।

3) गंभीर डिमेंशिया (Severe Dementia): इस चरण में लोग देखभाल करने वालों पर पूरी तरह से निर्भर हो जाते हैं। उन्हें आमतौर पर मल-मूत्र पर नियंत्रण न रहने (Incontinence) की समस्या होती है। चलने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
खुद से खाना बहुत धीमा हो जाता है। कुछ कार्यों से वे आसानी से व्यथित हो जाते हैं और देखभाल का विरोध कर सकते हैं।

4) अंतिम चरण का डिमेंशिया (End-stage Dementia): अंततः शरीर के सभी तंत्र प्रभावित हो जाते हैं। इस चरण में लोग चलने-फिरने में असमर्थ हो जाते हैं। वाणी पूरी तरह से अस्पष्ट हो जाती है। वे बिस्तर पर ही रहते हैं और भोजन निगलने का विरोध करते हैं।

अगली बार यदि कोई बुजुर्ग यह पूछता मिले, "आप कौन हैं, मैं कहाँ हूँ, मैं कौन हूँ", तो कृपया याद रखें कि यह किसी हिंदी फिल्म का संवाद नहीं है, यह किसी के लिए एक कड़वी हकीकत है।

पंकज मेहरोत्रा

*स्रोत डेस्क अनुसंधान है, पेशेवर सलाह के लिए कृपया विषय विशेषज्ञों से संपर्क करें।

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