जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है, हमारी 5 इंद्रियां कमजोर होने लगती हैं। किसी भी प्रकार की दुर्बलता न केवल हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती है, बल्कि हमारे जीवन की गुणवत्ता पर भी असर डालती है।
एक तरफ बुढ़ापे तक पहुंचना एक उपलब्धि के रूप में देखा जाता है, लेकिन दूसरी तरफ उम्र बढ़ने की प्रक्रिया की अपनी सीमाएं भी होती हैं।
देखने, सुनने, सूंघने, छूने और स्वाद लेने की क्षमता केवल दार्शनिक पहलू नहीं हैं, ये महत्वपूर्ण जैविक तंत्र हैं जिनकी नियमित निगरानी और देखभाल की आवश्यकता होती है।
उम्र से संबंधित सुनने की क्षमता में कमी (प्रेसबायकुसिस / presbycusis) सुनने की वह कमी है जो उम्र बढ़ने के साथ हममें से अधिकांश लोगों में धीरे-धीरे होती है। यह वृद्धजनों को प्रभावित करने वाली सबसे आम स्थितियों में से एक है।
एक्शन ऑन हियरिंग लॉस, यूके द्वारा तैयार संसाधन मार्गदर्शिका, "सपोर्टिंग ओल्डर पीपल विद हियरिंग लॉस इन केयर सेटिंग्स" (Supporting older people with hearing loss in care settings), प्रबंधकों और केयर होम कर्मचारियों के लिए एक बेहतरीन संक्षिप्त मार्गदर्शिका है।
उनकी रिपोर्ट "ए वर्ल्ड ऑफ साइलेंस" (A World of Silence) इस बात पर प्रकाश डालती है कि यदि केयर होम के निवासियों में सुनने की कमी की पहचान की जाए और उसका प्रभावी प्रबंधन किया जाए, तो अकेलेपन और सामाजिक अलगाव को कम करके तथा उनके समग्र स्वास्थ्य और खुशहाली में सुधार करके उनके जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने की वास्तविक संभावना बनती है।
यदि सुनने की अक्षमता के प्रभावी प्रबंधन में लोगों की सहायता न की जाए, तो इसके निम्नलिखित परिणाम हो सकते हैं:
- संवाद में कठिनाइयां (Communication difficulties)
- सामाजिक अलगाव और अकेलापन (Social isolation and loneliness)
- क्रोध और निराशा (Anger and frustration)
- आत्मविश्वास में कमी, विशेष रूप से सामाजिक परिवेश में (Low confidence, especially in social settings)
सुनने की कमी कई अन्य दीर्घकालिक बीमारियों के जोखिम या प्रभाव को भी बढ़ा देती है, और कई स्वास्थ्य स्थितियां उम्र बढ़ने से जुड़ी होती हैं, इसलिए उनके सुनने की कमी के साथ-साथ होने की संभावना रहती है।
उनकी रिपोर्ट "हियरिंग मैटर्स" (Hearing Matters) बताती है कि सुनने की कमी:
- अवसाद (डिप्रेशन) विकसित होने के जोखिम को दोगुना कर देती है
- चिंता (एंग्जायटी) और अन्य मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को बढ़ाती है
- डिमेंशिया (मनोभ्रंश) होने के जोखिम को बढ़ाती है
- हृदय रोग (cardiovascular disease), स्ट्रोक और मोटापे से जुड़ी है
- दृष्टि हानि और अधिक बार गिरने (falls) के जोखिम से जुड़ी हो सकती है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के पास "प्राइमरी ईयर एंड हियरिंग केयर ट्रेनिंग मैनुअल" (Primary Ear and Hearing Care Training Manual) नामक एक प्रशिक्षण मार्गदर्शिका है जिसे संलग्न दस्तावेज़ के साथ पढ़ा जा सकता है। इन दस्तावेजों में दी गई जानकारी चिकित्सीय सलाह नहीं है और यह केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है।
चूंकि भारत एक सामाजिक रूप से विकसित अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि बुजुर्गों की देखभाल (Aged Care) के लिए राष्ट्रीय स्तर के मानक, दिशानिर्देश और प्रशिक्षण सामग्री विकसित की जाए।
दस्तावेज़ को यहाँ देखा जा सकता है https://rnid.org.uk/ या यहाँ डाउनलोड किया जा सकता है (Hear To Care Guide) या नीचे देखा जा सकता है