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Elderly Care India

दैनिक जीवन की साधन-संबंधी गतिविधियां (Instrumental Activities of Daily Living)

वृद्ध देखभाल गृहों के कर्मचारियों के लिए व्यक्ति-केंद्रित देखभाल (person-centered care) के प्रति जागरूक और प्रशिक्षित होना कितना महत्वपूर्ण है, जिसमें निवासियों की गोपनीयता और गरिमा का सम्मान करने के साथ-साथ दैनिक जीवन की गतिविधियों (Activities of Daily Living) में उनकी सहायता करने में सक्षम होना शामिल है?

मेरा मानना है कि भारत को फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं का एक पेशेवर रूप से प्रशिक्षित कैडर तैयार करने में अभी एक लंबा रास्ता तय करना है, जो वरिष्ठ नागरिक देखभाल गृहों में बुजुर्गों के जीवन की गुणवत्ता (QoL) में सुधार लाने के लिए प्रशिक्षित हों।

दैनिक जीवन की गतिविधियां (Activities of Daily Living) वे कार्यात्मक गतिविधियां हैं जो हम सभी दैनिक आधार पर करते हैं; इन गतिविधियों को करने की क्षमता हमारी स्वतंत्रता या हमारी निर्भरता के स्तर को परिभाषित करती है।

ब्रश करना, नहाना, खाना आदि गतिविधियों को करने के लिए व्यक्तिगत स्वतंत्रता स्वतंत्र जीवन जीने (Independent Living) के लिए आवश्यक है और यहीं पर दैनिक जीवन की गतिविधियों का मूल्यांकन महत्वपूर्ण हो जाता है।

आमतौर पर जिन गतिविधियों को हम दैनिक जीवन की गतिविधियां (ADL) कहते हैं, उन्हें दो व्यापक श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है:

1) दैनिक जीवन की बुनियादी गतिविधियां (Basic Activities of Daily Living - ADL)

दैनिक जीवन की बुनियादी गतिविधियां किसी व्यक्ति की स्वतंत्र रूप से या सहायता से चलने की क्षमता, स्वयं भोजन करने या खिलाए जाने, स्वतंत्र रूप से या किसी की मदद से कपड़े पहनने, नहाने, शौचालय का उपयोग करने की क्षमता, संवारने (grooming), ब्रश करने (मौखिक देखभाल), शेव करने, जूते पहनने, बुनियादी संवाद आदि से संबंधित हैं।

2) दैनिक जीवन की साधन-संबंधी गतिविधियां (Instrumental Activities of Daily Living - IADL)

आईएडेल गतिविधियां एडीएल की तुलना में अधिक जटिल हैं और ये ऐसी गतिविधियां हैं जिन्हें स्वतंत्र रूप से करने के लिए मानसिक और शारीरिक क्षमताओं की आवश्यकता होती है। जैसे टेलीफोन का उपयोग करने की क्षमता, कपड़े धोना (laundry), खरीदारी करने जाना, यात्रा करना, खाना पकाने की क्षमता, घर का प्रबंधन और रखरखाव, अपने वित्त को संभालना, स्वयं दवा लेना आदि।

बहस का बड़ा मुद्दा यह है कि भारत में लगभग 70%-80% केयर होम धर्मार्थ संगठनों द्वारा संचालित किए जाते हैं और उनके पास पूरे संसाधन और/या योग्य कार्यबल नहीं हैं, ऐसे मामलों में क्या प्रशिक्षण मॉड्यूल केवल कागजी कार्रवाई बनकर रह जाते हैं या जमीनी स्तर पर उनका वास्तविक प्रभाव पड़ता है? मुझे लगता है कि यह हम तभी जान पाएंगे जब हमारे पास वृद्ध देखभाल पर राष्ट्रीय मानक होंगे।

एक अन्य महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि क्या किसी व्यक्ति की दैनिक जीवन की गतिविधियों को करने की क्षमता का मूल्यांकन केवल केयर होम की ज़िम्मेदारी होनी चाहिए या परिवार के सदस्यों को भी ऐसी गतिविधियों के बारे में पता होना चाहिए?

बार्थेल इंडेक्स (Barthel Index - BI), काट्ज़ इंडेक्स ऑफ इंडिपेंडेंस इन एक्टिविटीज़ ऑफ डेली लिविंग (Katz Index), फंक्शनल इंडिपेंडेंस मेजर्स (FIM), लॉटन इंस्ट्रूमेंटल एक्टिविटीज़ ऑफ डेली लिविंग स्केल (Lawton IADL Scale) आदि जैसे कई मूल्यांकन उपकरण और मापन पैमाने हैं जो किसी व्यक्ति की एडीएल / आईएडीएल गतिविधियों को करने की क्षमता के स्तर का मूल्यांकन करते हैं।

संलग्न मूल्यांकन उपकरण एम.पी. लॉटन और ई.एम. ब्रोडी द्वारा इंस्ट्रूमेंटल एक्टिविटीज ऑफ Daily Living (IADL) पर एक सरल मूल्यांकन उपकरण है जिसका उपयोग केयर होम और परिवार के सदस्यों द्वारा किया जा सकता है।

दस्तावेज़ को यहाँ डाउनलोड किया जा सकता है (Instrumental Activities of Daily Living) या नीचे देखा जा सकता है