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Elderly Care India

भारत में लिविंग विल और एडवांस डायरेक्टिव्स (Living Will & Advance Directives in India)

जीवन की सबसे कठिन स्थिति है—वृद्ध होना, निर्धन होना और जीवन के अंतिम चरण (End-of-life phase) में होना। 

कोई भी व्यक्ति दर्दनाक मौत नहीं मरना चाहता और बिना किसी सुधार की उम्मीद के असाध्य बीमारी (terminal illness) से पीड़ित नहीं रहना चाहता, लेकिन दुर्भाग्य से यह जीवन का एक कड़वा सच है।

ऐसे लोगों को राहत देने के लिए न्यायपालिका ने 2007 में निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) को वैध बनाया और "गरिमा के साथ मृत्यु का अधिकार" (Right to Death with Dignity) अस्तित्व में आया।

लिविंग विल / एडवांस मेडिकल डायरेक्टिव (Living Will / Advance Medical Directive) एक कानूनी दस्तावेज़ है जो चिकित्सा उपचार के बारे में किसी व्यक्ति की इच्छाओं को स्पष्ट करता है यदि वह निर्णय लेने में असमर्थ हो जाता है या संवाद करने में सक्षम नहीं रहता।

बहस का मुख्य बिंदु कानून की प्रक्रियाओं, गुण और दोषों के बारे में नहीं है, बल्कि मुख्य चिंता यह है कि यदि कोई केयर होम किसी निवासी द्वारा अपनी लिविंग विल / एडवांस डायरेक्टिव में दिए गए निर्देशों का पालन नहीं करता है, तो इसके क्या कानूनी निहितार्थ हैं?

चूँकि असाध्य रूप से बीमार उन रोगियों पर लागू होने वाले कानून के बारे में बहुत कम स्पष्टता थी और अब भी है जो जीवन रक्षक उपचार से इनकार करके प्राकृतिक मृत्यु चाहते हैं, ऐसे में उन केयर होम का क्या होता है जो किसी निवासी की लिविंग विल के निष्पादन को सुविधाजनक बनाने में असमर्थ हैं?

क्या निवासी का परिवार वरिष्ठ नागरिक की लिखित इच्छाओं का पालन न करने के लिए केयर होम प्रबंधन को अदालत में ले जा सकता है या केयर होम केवल मेडिकल स्टाफ या उपचार करने वाले चिकित्सक पर दोष मढ़ सकता है?

यदि मरना आसान होता तो मेरी राय में आधी दुनिया अब तक मर चुकी होती, लेकिन फिर यह एक संवेदनशील विषय है जिस पर कोई चर्चा नहीं करना चाहता।

चूँकि भारत में सीनियर केयर क्षेत्र दिन-ब-दिन अधिक संरचित और पेशेवर होता जा रहा है, इसलिए कभी न कभी उद्योग के अनुभवी विशेषज्ञों को मृत्यु का अधिकार (Right to Death), कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (CPR), डू-नॉट-रिससिटेट (DNR) जैसे मुद्दों पर मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOPs) को परिभाषित और अनुशंसित करना होगा।

वरिष्ठ नागरिक देखभाल गृहों के अधिकांश कर्मचारी मृत्यु के अधिकार (Right to Death) के बारे में जागरूक नहीं हैं, इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि ऐसे नाजुक मामलों को कैसे संभाला जाए, इसका आवश्यक प्रशिक्षण उनके इंडक्शन कार्यक्रम का एक अभिन्न हिस्सा बनना चाहिए।

पैलियम इंडिया (Pallium India) की वेबसाइट से लिया गया संलग्न दस्तावेज़ "एडवांस मेडिकल डायरेक्टिव (लिविंग विल) और हेल्थ केयर पावर-ऑफ-अटॉर्नी ऑथराइजेशन" एक स्व-व्याख्यात्मक मार्गदर्शिका है।

दस्तावेज़ को यहाँ डाउनलोड किया जा सकता है (Right to Death with Dignity) या नीचे देखा जा सकता है