सीनियर सिटीजन केयर होम में सर्वोत्तम हित निर्णय (Best Interests Decision) उन निवासियों के लिए और उनकी ओर से लिया जाने वाला निर्णय है जिनके पास अपने स्वयं के निर्णय लेने की क्षमता नहीं है।
जहाँ यह निर्णय लिया गया है कि डिमेंशिया से पीड़ित व्यक्ति स्वयं निर्णय लेने में असमर्थ है, देखभाल कर्मचारियों को वही करना चाहिए जो उस व्यक्ति के सर्वोत्तम हित में हो। इसे 'सर्वोत्तम हित निर्णय (Best Interests Decision)' के रूप में जाना जाता है।
भारत में, मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम (Mental Healthcare Act - MHA) 2017, धारा 17(a) में कहा गया है; इस अधिनियम के तहत अपने कर्तव्यों को पूरा करते समय, नामित प्रतिनिधि: (a) मानसिक बीमारी से पीड़ित व्यक्ति की वर्तमान और पिछली इच्छाओं, जीवन के इतिहास, मूल्यों, सांस्कृतिक पृष्ठभूमि और सर्वोत्तम हितों पर विचार करेगा।
मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम 2017 डिमेंशिया को विशेष रूप से निर्दिष्ट नहीं करता है और केवल मानसिक बीमारी की बात करता है, जिसके कारण "सर्वोत्तम हित" के संदर्भ में मेमोरी केयर और मानसिक क्षमता के कई पहलू कानूनी आवश्यकताओं और राष्ट्रीय ढांचे के अंतर्गत शामिल नहीं हैं।
दुर्भाग्य से भारत में डिमेंशिया/अल्जाइमर से पीड़ित वृद्ध लोगों की देखभाल करने के तरीके पर कोई राष्ट्रीय दिशानिर्देश नहीं हैं, जिसके कारण भारत के अधिकांश सीनियर सिटीजन केयर होम्स में डिमेंशिया देखभाल के लिए कोई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) नहीं है।
एक बार जब यह मूल्यांकन हो जाता है कि किसी निवासी को निर्णय लेने में बाहरी समर्थन की आवश्यकता है, तो उसकी देखभाल योजना में एक 'सर्वोत्तम हित निर्णय प्रपत्र (Best Interest Decision Form)' प्रलेखित किया जाना चाहिए।
इस प्रपत्र का उपयोग तब किया जाना चाहिए जब यह आकलन किया गया हो कि किसी व्यक्ति के पास कोई विशिष्ट निर्णय लेने की मानसिक क्षमता नहीं है।
निर्णय लेने की क्षमताओं के लिए किसी निवासी का मूल्यांकन करने हेतु अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपयोग किए जाने वाले मार्गदर्शक सिद्धांत हैं;
- यह माना जाता है कि एक व्यक्ति में निर्णय क्षमता है। क्षमता के अभाव को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया जाना चाहिए।
- किसी को भी तब तक निर्णय लेने में असमर्थ नहीं माना जाना चाहिए जब तक कि उसकी मदद के लिए सभी व्यावहारिक (उचित) कदम न उठा लिए गए हों और वे अप्रभावी साबित न हुए हों।
- एक व्यक्ति कोई अनुचित या अविवेकी निर्णय ले सकता है। इसका अनिवार्य रूप से यह अर्थ नहीं है कि उसमें निर्णय क्षमता का अभाव है।
- यदि यह निर्णय लिया जाता है कि किसी व्यक्ति में क्षमता का अभाव है, तो उसकी ओर से लिया गया कोई भी निर्णय उसके सर्वोत्तम हित में होना चाहिए।
चूंकि भारत में डिमेंशिया केयर के लिए व्यावहारिक रूप से कोई दिशानिर्देश नहीं हैं, इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि मेमोरी केयर होम्स को भारत में वृद्धजनों की देखभाल करने में अपने स्वयं के ज्ञान, समझ और अनुभव का उपयोग करना चाहिए।
एनएचएस दिशानिर्देशों के तहत वारिंगटन और हाल्टन अस्पतालों का संलग्न 'मेंटल कैपेसिटी असेसमेंट एंड बेस्ट इंटरेस्ट फॉर्म्स' एक ऐसा दस्तावेज़ है जिसे यूनाइटेड किंगडम के मेंटल कैपेसिटी एक्ट के साथ संदर्भित किया जा सकता है।
मेमोरी केयर एक विशिष्ट क्षेत्र है जिसमें गहन समझ और प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है, इसलिए डिमेंशिया/अल्जाइमर से पीड़ित वरिष्ठ नागरिकों को कैसे संभालना है, इस पर बुनियादी मानक अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
दस्तावेज़ को वेबसाइट https://whh.nhs.uk/ पर देखा जा सकता है या यहाँ डाउनलोड किया जा सकता है (Best Interests Decision Form in Elderly Care Homes) या नीचे पढ़ा जा सकता है