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Elderly Care India

बुजुर्गों के केयर होम्स में भोजन और पोषण (Food & Nutrition in Elderly Care Homes)

भारत में खान-पान की आदतें भौगोलिक स्थिति, सांस्कृतिक प्रथाओं, धार्मिक जुड़ाव और आध्यात्मिक विश्वासों के अनुसार बदल सकती हैं।

यद्यपि देश भर में भोजन के तौर-तरीके भिन्न हो सकते हैं, फिर भी भारतीय जैविक और पाचन तंत्र के साथ उनके आहार व पोषण की अनुकूलता में समानता पाई जाती है।

भारत में शाकाहारी और मांसाहारी भोजन के बीच एक स्पष्ट और अनूठा विभाजन देखने को मिलता है। भारत में भोजन के जितने प्रकार और संयोजन (combinations) देखने को मिलते हैं, वह अपने आप में एक शोध का विषय है। कुछ लोग मंगलवार या गुरुवार को छोड़कर बाकी दिन मांसाहारी भोजन खाते हैं, कुछ केवल अंडा खाते हैं, कुछ केवल मछली खाते हैं, कुछ प्याज और लहसुन नहीं खाते, कुछ कुछ खास दिनों में उपवास रखते हैं आदि।

खान-पान की आदतों में भिन्नता सांस्कृतिक विविधता और समृद्ध विरासत का संकेत हो सकती है, हालांकि अधिकांश व्यंजन अंततः स्थानीय उपज पर निर्भर होते हैं और पारंपरिक खान-पान की आदतों से प्रभावित होते हैं। 

पिछले 4 दशकों में कई भारतीयों को अन्य देशों में प्रवास करते देखा गया है, फिर भी उनके खान-पान की आदतें काफी हद तक अपरिवर्तित रही हैं। किसी विदेशी धरती पर भारतीय भोजन पसंद करने का कारण मानवविज्ञानियों के लिए एक विषय हो सकता है, लेकिन मेरी राय में इसका अधिक संबंध हमारे रीति-रिवाजों और पाचन क्षमता से है।

जैसे-जैसे अधिक भारतीय अपने अपनाए गए देशों में वृद्ध हो रहे हैं, उनमें से कई बुजुर्गों के लिए आवासीय देखभाल गृहों (residential care homes) में प्रवेश कर रहे हैं। 

बुजुर्गों के बीच असहजता का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र वृद्धाश्रमों में परोसा जाने वाला भोजन है। चूंकि अधिकांश भारतीय दैनिक आधार पर कॉन्टिनेंटल, इतालवी या अन्य पश्चिमी आहार खाने में सहज नहीं होते हैं, इसलिए वे अपने मुख्य भारतीय आहार पर ही टिके रहना पसंद करते हैं।

बहस का मुख्य बिंदु यह है कि भारत जैसे देश में हम वरिष्ठ नागरिक केयर होम्स में भोजन और पोषण को कितना महत्व देते हैं? 

आमतौर पर पश्चिमी और उत्तरी भारत में वरिष्ठ नागरिक होम्स शाकाहारी भोजन परोसते हैं, जबकि पश्चिम बंगाल, केरल, ओडिशा जैसे राज्य साप्ताहिक मेनू के हिस्से के रूप में मछली, मुर्गी और अन्य मांस परोसते हैं।

यद्यपि नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रिशन (NIN), हैदराबाद द्वारा संसाधन दस्तावेज़ “डाइटरी गाइडलाइन्स फॉर इंडियंस” (Dietary Guidelines for Indians) में भारतीयों की पोषण संबंधी जरूरतों को शामिल किया गया है, लेकिन यह किशोरों और युवा आबादी पर अधिक केंद्रित है।

भारत में सीनियर केयर क्षेत्र के विकास के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वृद्धजनों के लिए भोजन और पोषण पर राष्ट्रीय स्तर के दिशानिर्देश व्यापक जनहित में प्रकाशित किए जाने चाहिए।

वेल्श सरकार द्वारा संसाधन मार्गदर्शिका "फूड एंड न्यूट्रिशन इन केयर होम्स फॉर ओल्डर पीपल – बेस्ट प्रैक्टिस गाइडेंस" (Food and Nutrition in Care Homes for Older People – Best Practice Guidance) एक अच्छी तरह से तैयार की गई प्रशिक्षण सामग्री है जो केयर होम ऑपरेटरों को अपने स्वयं के मानक और दिशानिर्देश विकसित करने में मदद कर सकती है।

यदि हम चाहते हैं कि हमारे बुजुर्ग एक सुखी और स्वस्थ जीवन जिएं, तो यह महत्वपूर्ण है कि एक देश के रूप में हम बुजुर्गों की देखभाल (Elderly Care) को गंभीरता से लेना शुरू करें।

दस्तावेज़ को वेबसाइट Visit www.tewhatuora.govt.nzhttps://www.gov.wales/ पर देखा जा सकता है या यहाँ डाउनलोड किया जा सकता है (Food & Nutrition in Elderly Care Homes) या नीचे पढ़ा जा सकता है