चूँकि भारतीय सीनियर लिविंग और होम केयर बाज़ार विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों में धीरे-धीरे अपने पैर पसार रहा है, इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि देखभाल कर्मचारियों को सुरक्षा और संरक्षा के कुछ पहलुओं पर प्रशिक्षित किया जाना चाहिए।
लोन वर्किंग पॉलिसी (Lone Worker Policy) उन लोगों के स्वास्थ्य और सुरक्षा विचारों से प्रेरित है जिन्हें आमतौर पर लंबे समय तक अकेले काम करना पड़ता है, और जिसके परिणामस्वरूप वे केयर होम या डोमिसिलियरी (घरेलू) देखभाल व्यवस्था में अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा के बढ़ते जोखिमों का सामना करते हैं।
कर्मचारियों के कुछ सदस्यों को बिना किसी करीबी या प्रत्यक्ष पर्यवेक्षण के समुदाय में अकेले काम करना पड़ता है, कभी-कभी अलग-थलग कार्य क्षेत्रों में या कार्यालय समय के बाद। ये कार्यकर्ता और स्वयंसेवक संभावित रूप से जोखिम में होते हैं और निवासियों के लिए भी जोखिम पैदा कर सकते हैं।
केयर होम में अकेले काम करने का मतलब है मानसिक बीमारी वाले निवासियों के साथ लगातार बातचीत करना, चाहे वह डिमेंशिया हो, अल्जाइमर, बाइपोलर या सिज़ोफ्रेनिया हो, और दुर्भाग्य से ये लोग हिंसक हो सकते हैं जिससे कर्मचारी खतरनाक स्थितियों में पड़ सकते हैं।
खतरा केवल केयर होम के निवासियों से ही नहीं है, यह एक अकेले कार्यकर्ता (Lone Worker) से भी है जिसे विभिन्न तरीकों से निवासियों के साथ दुर्व्यवहार करने का मौका मिल सकता है, विशेष रूप से उन महिलाओं के साथ जिन्हें डिमेंशिया है और वे शारीरिक दुर्व्यवहार को याद रखने या प्रबंधन को रिपोर्ट करने की मानसिक स्थिति में नहीं हो सकती हैं।
एज यूके (Age UK) द्वारा संलग्न दस्तावेज़ भारत में केयर होम ऑपरेटरों के लिए एक उपयोगी पठनीय सामग्री है।
अकेले कार्यकर्ता संबंधी नीति और दिशानिर्देश बहुत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि आवासीय देखभाल गृहों / शेल्टर्ड हाउसिंग में जाने वाले वृद्ध लोगों की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है।
दस्तावेज़ को वेबसाइट https://www.ageuk.org.uk/ पर देखा जा सकता है या यहाँ डाउनलोड किया जा सकता है (Lone Worker Policy for Senior Citizen Care Homes) या नीचे पढ़ा जा सकता है