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Elderly Care India

घर में अनुकूलन - चेयर लिफ्ट (Chair Lift)

जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है, घर की आवश्यक सुविधाओं और बनावट में बदलाव या अनुकूलन (Adaptations) की आवश्यकता महसूस होने लगती है। सुगम्यता और पहुंच (Accessibility) की आवश्यकता अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।

घर के सुंदर साजो-सामान, भव्य झाड़-फानूस और रोजवुड की सीढ़ियां आदि विलासिता और सजावट की वस्तुएं रहने के बजाय बाधा या असुविधा का कारण बनने लगती हैं।

एक ओर उम्र का बढ़ना शायद जीवन का सबसे सुंदर पड़ाव हो सकता है, लेकिन इसकी अपनी सीमाएं भी होती हैं। उम्र बढ़ने के साथ-साथ हमारी मानसिक और शारीरिक क्षमताएं कमजोर होने लगती हैं।

यद्यपि हम सभी जानते हैं कि उम्र केवल एक संख्या है, फिर भी जीवन की कुछ ऐसी सच्चाइयां हैं जिन्हें अनदेखा नहीं किया जा सकता। मुझे लगता है कि वृद्धावस्था का यही यथार्थ है, कम से कम आज के समय में।

हाल ही में हमने अपने घर के अंदर एक चेयर लिफ्ट (Chair Lift) लगवाई। इसे किसी दिखावे या प्रतिष्ठा के लिए नहीं लगवाया गया, बल्कि यह विशुद्ध रूप से आवश्यकतावश लगाई गई थी।

मेरे 83 वर्षीय पिता के लिए डुप्लेक्स घर में आना-जाना केवल निचले तल तक ही सीमित हो गया था। ऊपरी मंजिलों पर सीढ़ियों से चढ़ना उनके लिए एक बड़ी चुनौती बन गया था। इसके परिणामस्वरूप ऊपर की मंजिलों की देखभाल और रख-रखाव भी प्रभावित होने लगा था।

इसका समाधान सीढ़ियों के लिए चेयर लिफ्ट के रूप में सामने आया। घर के इस अनुकूलन (Home Adaptation) ने न केवल उनके आवागमन को आसान बनाया, बल्कि उन्हें एक नया आत्मविश्वास और गरिमा भी प्रदान की।

मेरी राय में, यदि किसी के पास साधन हैं, तो सहायक एवं अनुकूलन तकनीक (Assistive / Adaptive Technology) में निवेश करना पूरी तरह सार्थक है।

पंकज मेहरोत्रा

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