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Elderly Care India

रिटायरमेंट कम्युनिटीज / असिस्टेड लिविंग सुविधाओं के लिए डिज़ाइन सिद्धांत

वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक रिटायरमेंट कम्युनिटी या असिस्टेड लिविंग सुविधा को डिज़ाइन करने के लिए वास्तुकारों (architects), देखभालकर्ताओं (caregivers), फिजियोथेरेपिस्ट्स, मनोरंजक चिकित्सक (recreational therapists), खाद्य एवं पेय प्रबंधकों, वरिष्ठ आवास सलाहकारों और अन्य विशेषज्ञों के सामूहिक इनपुट की आवश्यकता होती है।

असिस्टेड लिविंग होम्स केवल ईंट-गारे की इमारतें नहीं हैं, वे सुरक्षा, देखभाल, कल्याण और आतिथ्य से जुड़े हैं।

चाहे यह कोई नई (ग्रीनफील्ड) परियोजना हो या किसी मौजूदा वरिष्ठ आवास परियोजना में संशोधन और रीट्रोफिटिंग, "फ्यूचर प्रूफ होम्स" (भविष्य के अनुकूल घर) की अंतर्निहित विचारधारा अत्यंत महत्वपूर्ण है।

जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है, हमारी शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक ज़रूरतें बदलती हैं। जो घर 40 की उम्र में हमारे लिए उपयुक्त होता है, वह हमारे जीवन के उत्तरार्ध में या सीमित गतिशीलता होने पर अथवा सामुदायिक सहायता सुविधाओं की आवश्यकता पड़ने पर उपयुक्त नहीं रह सकता।

जब तक हम "लाइफटाइम होम्स स्टैंडर्ड्स" के अनुसार घरों का निर्माण नहीं करते, तब तक घर में फेरबदल करने या वरिष्ठ-अनुकूल घरों में स्थानांतरित होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।

शोध से यह साबित हुआ है कि एक सुरक्षित, संरक्षित और तनावमुक्त रिटायरमेंट कम्युनिटी का सकारात्मक वातावरण बुजुर्गों के जीवनकाल को बढ़ाने के साथ-साथ उनके समग्र स्वास्थ्य में सुधार करता है।

यह महत्वपूर्ण है कि डेवलपर्स और सीनियर केयर ऑपरेटर्स वरिष्ठ नागरिकों के आवास के लिए डिज़ाइन दिशानिर्देशों के महत्व के प्रति जागरूक और जानकार हों, अन्यथा अंतिम उत्पाद केवल छलावे से अधिक कुछ नहीं होगा।

यद्यपि प्रत्येक वरिष्ठ आवास परियोजना अपने तरीके से अनूठी होती है, फिर भी कुछ ऐसे सिद्धांत और स्थान नियोजन (space planning) हैं जो अधिक नहीं बदलते। क्षेत्रफल विवरण (Area statement) अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह प्रति निवासी अनुशंसित आवासीय और सामुदायिक क्षेत्रों को परिभाषित करता है।

यदि सामुदायिक क्षेत्र बहुत बड़े हों तो घर में एक संस्थागत (institutional) रूप आ सकता है, दूसरी ओर यदि क्षेत्र बहुत छोटे हों तो अत्यधिक भीड़ और असुविधा हो सकती है।

यदि आवास इकाइयों या सामान्य क्षेत्रों में रोशनी बहुत कम हो तो बुजुर्गों के गिरने का जोखिम बढ़ जाता है, और यदि यह बहुत तेज़ हो तो आंखों को नुकसान पहुँचा सकती है। इसी प्रकार यदि रैंप का ढलान बहुत तीव्र हो तो व्हीलचेयर का स्वयं उपयोग करना कठिन हो जाता है और पीछे गिरने का खतरा रहता है; और यदि यह बहुत धीमा हो तो रास्ता बहुत लंबा हो सकता है और डेवलपर्स के लिए वित्तीय रूप से अव्यवहारिक हो सकता है।

वृद्धजनों के लिए असिस्टेड लिविंग को दुनिया भर में कई नामों से जाना जाता है—चाहे वह रिटायरमेंट कम्युनिटीज़ हो, रिटायरमेंट विलेज, असिस्टेड लिविंग, या एक्स्ट्रा केयर हाउसिंग, आमतौर पर इन सभी का एक ही अर्थ होता है।

निर्माण हेतु अंतिम नक्शों को स्वीकृत कराने से पहले वरिष्ठ आवास डिज़ाइन सिद्धांतों पर देश-विशिष्ट मानकों, नीतियों, दिशानिर्देशों, मानदंडों, अनुमोदनों, प्रमाणन और मान्यता का संदर्भ लेना हमेशा उचित होता है। 

हाउसिंग लर्निंग एंड इम्प्रूवमेंट नेटवर्क (UK) द्वारा जारी संसाधन मार्गदर्शिका "डिज़ाइन प्रिंसिपल्स फॉर एक्स्ट्रा केयर हाउसिंग" (Design Principles for Extra Care Housing) वृद्धजनों के लिए देखभाल युक्त आवास की रूपरेखा तैयार करने हेतु एक उत्कृष्ट सारांश है।

इस दस्तावेज़ को https://www.housinglin.org.uk/ पर देखा जा सकता है या यहाँ डाउनलोड किया जा सकता है (रिटायरमेंट कम्युनिटीज के लिए डिज़ाइन सिद्धांत) या नीचे देखा जा सकता है