कहा जाता है कि "ज्ञान ही शक्ति है", लेकिन वास्तव में कितने वृद्धजन अपने अधिकारों और शक्तियों के प्रति जागरूक हैं? यह भी कहा जाता है कि "कलम की ताकत तलवार से अधिक होती है", लेकिन भारत में कितने गरीब और वंचित बुजुर्ग पढ़ना-लिखना जानते हैं?
एक तरफ जहां नागरिक-अनुकूल नीतियों, योजनाओं और कार्यक्रमों की कमी के लिए सरकार की आलोचना करना आसान है, वहीं दूसरी तरफ क्या हम नागरिक के रूप में वास्तव में उन मौजूदा नीतियों से अवगत हैं जो हमें प्रभावित करती हैं?
मेरी राय में, यदि वृद्धजन देखभाल (elderly care) क्षेत्र को आगे बढ़ना है, तो लोगों को व्यापक जनहित के लिए अपने अनुभवों और सीख को साझा करने की आवश्यकता है।
मेरा मानना है कि अपने ज्ञान और सीख को अपने साथ ले जाने के बजाय, उसे साझा करके देश के काम आना कहीं बेहतर है।
यद्यपि अधिकांश नीतियां, कार्यक्रम और योजनाएं गरीब, वंचित और असहाय बुजुर्गों के लाभ के लिए हैं, फिर भी इसका मतलब यह नहीं है कि मध्यम वर्ग और संपन्न वर्ग इनमें शामिल नहीं हैं।
यदि शिक्षित लोग गरीब और वंचित वृद्धजनों के हित के लिए आवाज नहीं उठाएंगे, तो फिर कौन उठाएगा।
शोध और संकलन का यह कार्य किसी छिपे हुए एजेंडे, वित्तीय लाभ या राजनीतिक झुकाव पर आधारित नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक रूप से जागरूक नागरिक के रूप में किया गया प्रयास है।
केंद्र सरकार, राज्य सरकारें, नागरिक समाज (Civil Society), निजी क्षेत्र, व्यक्ति और परोपकारी संस्थाएं जो वृद्धजन देखभाल में रुचि रखते हैं या जुड़े हुए हैं, वे इस संक्षिप्त विवरण की समीक्षा कर सकते हैं और अपनी प्रतिक्रिया साझा कर सकते हैं।
आशा है कि अधिक से अधिक जागरूक नागरिक एक सशक्त, समृद्ध और सामाजिक रूप से विकसित भारत के निर्माण के लिए सामूहिक रूप से आगे आएंगे।
पंकज मेहरोत्रा
नीतियां, अधिनियम और योजनाएं संबंधी दस्तावेज़ नीचे देखा जा सकता है
