मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम (Mental Healthcare Act) मानसिक बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण विधायी अधिनियम है। यह वृद्धजनों और देखभाल संचालकों (care operators) के लिए और भी अधिक महत्वपूर्ण है, विशेष रूप से उन स्थितियों में जहाँ निवासी या बुजुर्ग अपने लिए निर्णय लेने में असमर्थ होते हैं। मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017 ("MHCA") एक ऐसा कानून है जो भारत में मानसिक स्वास्थ्य देखभाल और उपचार की व्यवस्था और विनियमन करता है।
एमएचसीए (MHCA) 29 मई 2018 को लागू हुआ, जिसने पूर्ववर्ती मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम, 1987 को निरस्त कर दिया। इसे दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन, 2006 ("UNCRPD") के तहत दायित्वों के अनुसरण में अधिनियमित किया गया था, जिसे भारत ने 2007 में अनुमोदित किया था।
एमएचसीए मानसिक बीमारी से पीड़ित व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा के लिए सरकार और मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों पर दायित्व सौंपकर मानसिक स्वास्थ्य देखभाल और उपचार के प्रति अधिकार-आधारित दृष्टिकोण (rights-based approach) अपनाता है।
एमएचसीए के बुनियादी मार्गदर्शक सिद्धांत:
- सभी व्यक्तियों को समानता, स्वतंत्रता और गरिमा के अधिकार सहित बुनियादी मानवाधिकार प्राप्त हैं।
- प्रत्येक व्यक्ति को वे निर्णय लेने की स्वायत्तता (autonomy) दी जानी चाहिए जो वे अपने लिए सबसे अच्छे समझते हैं, और इसमें उनकी मानसिक स्वास्थ्य देखभाल और उपचार से संबंधित निर्णय भी शामिल हैं।
- प्रत्येक व्यक्ति को समाज में पूर्ण भागीदारी और समावेशन का अधिकार है।
- किसी भी व्यक्ति के साथ जाति, वर्ग, जातीयता, लिंग, जेंडर, यौन अभिविन्यास, धर्म, दिव्यांगता, सामाजिक, राजनीतिक या सांस्कृतिक मान्यताओं जैसे किसी भी आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता है।
- प्रत्येक व्यक्ति को अपने निर्णय स्वयं लेने में सहायता प्राप्त करने के लिए किसी भी प्रकार का सहयोग पाने का अधिकार है।
दस्तावेज़ 'मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017' यहाँ डाउनलोड किया जा सकता है या नीचे देखा जा सकता है
देखभालकर्ताओं के लिए 'मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017 प्रशिक्षण नियमावली' दस्तावेज़ यहाँ डाउनलोड किया जा सकता है या नीचे देखा जा सकता है
मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017
मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017 के लिए प्रशिक्षण नियमावली