स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा प्रकाशित यह दस्तावेज़ स्वास्थ्य देखभाल अपशिष्ट (healthcare waste) के संदर्भ में अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि कई पुनर्वास देखभाल केंद्र (rehabilitation care homes), उच्च निर्भरता देखभाल केंद्र (high dependency care homes), असिस्टेड लिविंग सुविधाएं और होम केयर सेवा एजेंसियां जैव-अपशिष्ट (biowaste) का प्रबंधन करती हैं।
जैव-चिकित्सा अपशिष्ट (Bio-medical waste) का तात्पर्य ऐसे किसी भी कचरे से है, जो मनुष्यों या जानवरों के निदान (diagnosis), उपचार या टीकाकरण (immunization), या उससे संबंधित अनुसंधान गतिविधियों, या जैविक उत्पादों के उत्पादन या परीक्षण, अथवा स्वास्थ्य शिविरों के दौरान उत्पन्न होता है। जैव-चिकित्सा अपशिष्ट में स्वास्थ्य सेवा सुविधा (Health Care Facility) से उत्पन्न वह सारा कचरा शामिल है, जिसका ठीक से निपटान न किए जाने पर किसी व्यक्ति के स्वास्थ्य या सामान्य पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। ऐसा कोई भी कचरा जो पर्यावरण या किसी व्यक्ति के स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचा सकता है, उसे संक्रामक माना जाता है और इस प्रकार के कचरे का प्रबंधन बीएमडब्ल्यूएम नियम, 2016 (BMWM Rules, 2016) के अनुसार किया जाना अनिवार्य है।
स्वास्थ्य सेवा सुविधा से उत्पन्न कुल कचरे में से ऐसे कचरे की मात्रा लगभग 10% से 15% होती है। इस कचरे में वे सामग्रियां शामिल होती हैं जो मरीज के रक्त, स्राव (secretions), संक्रमित अंगों, रसायनों जैसे जैविक तरल पदार्थों, चिकित्सा आपूर्तियों, दवाओं, प्रयोगशाला डिस्चार्ज, धातु व कांच के नुकीले उपकरणों (sharps metallic and glassware), प्लास्टिक आदि के संपर्क में आई हों।
इस दस्तावेज़ को यहाँ डाउनलोड किया जा सकता है (स्वास्थ्य देखभाल अपशिष्ट प्रबंधन दिशानिर्देश) या नीचे देखा जा सकता है