भारत में आवास राज्य सूची का विषय है। यद्यपि केंद्र सरकार वृद्धाश्रमों और केयर होम्स की स्थापना के लिए मानक एवं दिशानिर्देश सुझा सकती है, लेकिन अंततः बुजुर्गों के कल्याण और वृद्धावस्था देखभाल की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की ही होती है।
राष्ट्रीय स्तर की सिफारिशों के अनुसार प्रत्येक जिले में 150 बिस्तरों वाला एक वृद्धाश्रम होना चाहिए, लेकिन दुर्भाग्यवश ज़मीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।
चूंकि भारत में वृद्ध देखभाल क्षेत्र के विकास में सहायता और निगरानी के लिए कोई आधिकारिक प्रत्यायन एवं मानक एजेंसी (Accreditation and Standards Agency) नहीं है, इसलिए किसी भी न्यूनतम राष्ट्रीय मानक को लागू करना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
सेंटर फॉर जेरोन्टोलॉजिकल स्टडीज के डॉ. पी. के. बी. नायर द्वारा तैयार की गई 'वृद्धाश्रम मार्गदर्शिका' (Manual on Old Age Homes) केरल सरकार के सामाजिक न्याय विभाग के लिए बनाई गई थी। यद्यपि व्यक्तिगत रूप से मैं इसे 'वरिष्ठ नागरिक गृह या एल्डरली केयर होम नियमावली' कहना अधिक पसंद करता, फिर भी यह एक अत्यंत विस्तृत दस्तावेज है जो सरकारी और धर्मार्थ संस्थाओं द्वारा संचालित वृद्धाश्रमों के लिए निश्चित रूप से बहुत उपयोगी साबित होगा।
यह मार्गदर्शिका परिचालन दिशानिर्देशों और मानकों की एक विस्तृत श्रृंखला को शामिल करती है, जिसे यदि सही भावना से लागू किया जाए तो यह किसी भी वृद्धाश्रम के कामकाज और गुणवत्ता में काफी सुधार ला सकती है।
चूंकि यह मार्गदर्शिका सरकारी वृद्धाश्रमों के लिए तैयार की गई है, इसलिए मुझे लगता है कि इसमें कुछ ऐसी सिफारिशें हैं जो बहुत अधिक संस्थागत स्वरूप की हैं और उन पर पुनर्विचार किया जा सकता है। कुल मिलाकर यह एक उत्कृष्ट दस्तावेज है जिससे कई सीनियर लिविंग संचालकों को लाभ मिल सकता है।
इतनी सुव्यवस्थित नियमावली प्रस्तुत करने के लिए डॉ. नायर और उनकी टीम को धन्यवाद। यह दस्तावेज यहाँ डाउनलोड किया जा सकता है या नीचे देखा जा सकता है।