सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए होम केयर और हॉस्पिस (उपशामक देखभाल) हेतु एकसमान स्वीकार्य मानक तैयार करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया था।
यद्यपि यह निश्चित रूप से एक सकारात्मक कदम है, फिर भी मेरी व्यक्तिगत राय में इन दिशानिर्देशों को और अधिक विस्तार से स्पष्ट करने की आवश्यकता है।
होम केयर और उपशामक/हॉस्पिस केयर (Palliative/Hospice Care) अलग-अलग प्रकार की देखभाल सेवाएं हैं, जिनके लिए आदर्श रूप से अलग-अलग मानक और दिशानिर्देश होने चाहिए। विभिन्न प्रकार की देखभाल सेवाओं को एक साथ मिलाने से सेवा प्रदाताओं में भ्रम पैदा हो सकता है और नियमों के अनुपालन न होने की संभावना बढ़ सकती है।
सिफारिशें बहुत सामान्य प्रकृति की प्रतीत होती हैं, जिससे व्यवस्था और सेवा वितरण में कमियां रह जाने की संभावना है।
समिति द्वारा अनुशंसित कुछ बिंदु नीचे दिए गए हैं जिन पर अधिक विचार-विमर्श की आवश्यकता हो सकती है:
नियम 1.4: बुनियादी होम केयर सेवाएं देखभाल प्रदाताओं द्वारा प्रदान की जाएंगी, जिनमें जेरियाट्रिक एनिमेटर (एनआईएसडी या किसी समकक्ष संगठन द्वारा प्रशिक्षित), काउंसलर, फिजियोथेरेपिस्ट, आहार विशेषज्ञ और स्वयंसेवक शामिल हैं, लेकिन यह इन्हीं तक सीमित नहीं हैं।
यदि इस नियम का अक्षरशः पालन किया जाए, तो 95% होम केयर प्रदाता अपात्र हो जाएंगे।
नियम 1.7.1: प्रत्येक जिला समुदाय से 5 से 6 प्रशिक्षित स्वयंसेवकों का एक समूह बनाएगा जो 20 किलोमीटर के दायरे में प्रति सप्ताह 2 से 3 घरेलू दौरे करेंगे।
भारत में स्वयंसेवा बहुत सफल और व्यावहारिक मॉडल नहीं रही है; ऐसे में जिला स्तरीय स्वयंसेवा कार्यक्रम के निरंतर सफल होने की उम्मीद करना शायद वास्तविकता से परे होगा।
नियम 3.3: होम केयर टीम में एक ऐसा काउंसलर शामिल होगा जिसके पास क्लिनिकल साइकोलॉजी में एमएससी/एम.फिल की डिग्री और उपशामक देखभाल (Palliative Care) में एक वर्ष का अनुभव हो।
इस नियम का पालन करना संभवतः कठिन है क्योंकि बहुत से सेवा प्रदाता धर्मार्थ संगठन हैं जिनके पास उच्च पेशेवर योग्यता वाले लोगों को नियुक्त करने के साधन नहीं हैं।
नियम 3.6: होम केयर टीम में एक ऐसा जेरियाट्रिक एनिमेटर शामिल होगा जिसके पास राष्ट्रीय सामाजिक रक्षा संस्थान (NISD) या किसी समकक्ष संगठन से जेरियाट्रिक एनिमेटर कोर्स उत्तीर्ण करने का प्रमाण पत्र हो।
नियम संख्या 1.4 की तरह यह नियम भी एक समस्या बन सकता है, क्योंकि भारत में अधिकांश होम केयर प्रदाता छोटे स्तर पर काम करने वाली एजेंसियां हैं जो संभवतः 'जेरियाट्रिक एनिमेटर' शब्द से भी वाकिफ नहीं हैं। सुचारू क्रियान्वयन के लिए एनआईएसडी के समकक्ष संगठनों को स्पष्ट रूप से नामित किया जाना चाहिए, ताकि भ्रम की स्थिति न रहे।
अपने विचारों को संक्षेप में कहूं तो मुझे लगता है कि इस दस्तावेज में देखभालकर्ताओं के कार्यक्षेत्र (Scope of Work) यानी देखभालकर्ताओं, नर्सों, पैरामेडिक्स आदि के जॉब प्रोफाइल पर भी बात की जानी चाहिए थी। होम केयर सेवा के हिस्से के रूप में दवाएं या इंजेक्शन देने के लिए कौन योग्य है, इस प्रश्न को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया जाना चाहिए।
दूसरे, एक नमूना सेवा अनुबंध (Sample Service Agreement) भी साझा किया जाना चाहिए था जिसमें सेवा प्रदाताओं के लिए क्षतिपूर्ति (Indemnity), संभावित दुर्व्यवहार के खिलाफ कार्रवाई, विवाद समाधान, कानूनी देनदारियां, शिकायत निवारण प्रणाली आदि जैसी चीजें दर्ज हों।
होम केयर मानक एवं दिशानिर्देश दस्तावेज यहाँ डाउनलोड किया जा सकता है या नीचे देखा जा सकता है।