कभी-कभी ऐसा लगता है कि भारत में बुजुर्गों के देखभाल गृहों (Elderly Care Homes) के लिए राष्ट्रीय मानक ढूंढने की तुलना में चांद पर जाना आसान है।
लगभग 1700 वरिष्ठ नागरिक देखभाल गृह (एनजीओ, सरकारी और निजी) अधिकांशतः बिना किसी राष्ट्रीय मानक के चलाए जा रहे हैं।
केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2020-21 में अटल वयो अभ्युदय योजना (AVYAY) के तहत 551 गृहों को सहायता प्रदान की, लेकिन दुर्भाग्य से सेवा वितरण मानकों का स्तर अभी भी बहस का विषय है।
चूँकि वरिष्ठ नागरिक गृहों के लिए कोई विस्तृत और/या विशिष्ट बिल्डिंग कोड नहीं है, इसलिए उनमें से अधिकांश का निर्माण वास्तुकारों (architects) की अपनी बौद्धिक समझ के अनुसार हुआ है और हो रहा है।
चूँकि वरिष्ठ नागरिक देखभाल गृहों (वृद्धाश्रमों) के लाइसेंस और पंजीकरण से संबंधित जानकारी बहुत सीमित है, इसलिए कई गृह गेस्ट हाउस, हॉस्टल, नर्सिंग होम आदि के रूप में संचालित हो रहे हैं या पंजीकृत ही नहीं हैं।
बुजुर्गों की देखभाल सहित समाज कल्याण राज्य का विषय है, जिसके कारण इस क्षेत्र का विकास खंडित रूप में हुआ है। कुछ राज्य सरकारें सक्रिय रही हैं, लेकिन एक देश के रूप में, वृद्धजनों की देखभाल के मामले में सामाजिक रूप से विकसित होने से हम अभी बहुत दूर हैं।
तमिलनाडु सरकार ने 2016 में वृद्धाश्रमों के लिए न्यूनतम मानकों का एक संशोधित संस्करण प्रकाशित किया था, जो यहाँ संलग्न है। दुर्भाग्य से दस्तावेज़ को इस तरह से प्रारूपित किया गया था कि इसे सही करके सार्वजनिक डोमेन में साझा करना मेरे लिए एक कठिन कार्य था।
यदि भारत बुजुर्गों के अनुकूल देश के रूप में पहचान बनाना चाहता है, तो हमें विकसित देशों की बराबरी करने के लिए पूंजीगत और बौद्धिक संसाधन लगाने होंगे।
अब समय आ गया है कि संबंधित हितधारक इस बढ़ती समस्या पर ध्यान दें, अन्यथा आने वाले वर्षों में देश के सामने इस अव्यवस्था को सुलझाने की बहुत बड़ी चुनौती होगी।
दस्तावेज़ 'वृद्धाश्रमों के लिए आवश्यक मानक - तमिलनाडु सरकार' यहाँ डाउनलोड किया जा सकता है या नीचे देखा जा सकता है